हिन्दी परिचय 2 वीडियो का आडियो संस्करण, उन लोगों के लिये जो आडियो अधिक पसंद करते हैं. कृपया ध्यान दें कि यह परिचय अंग्रेजी में है. फार्मेट MP3

The audio extracted from Introduction To Hindi 2 video. In MP3 format here for those with limited bandwidth. 

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The Hindi-study videos in English, broadcast by IICET (Hindi Gurukul) can now all be seen on this video screen. The Left/Right arrows on the screen can be used to choose the videos. Also, if you move the mouse at the bottom of the screen, the available videos are displayed.

अहिन्दी भाषियों के लिये अंग्रेजी द्वारा हिन्दी-अध्ययन  के सारे उपलब्ध वीडियो यहां देखे जा सकते हैं. स्क्रीन पर बांये/दांये तीर की सहायता से आप विभिन्न पाठ चुन सकते हैं. स्क्रीन के निचले हिस्से में चूहा फिराने पर भी उपलब्ध वीडियो के बारे में जानकारी आ जाती है.

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हिन्दी परिचय 1 वीडियो का आडियो संस्करण, उन लोगों के लिये जो आडियो अधिक पसंद करते हैं. कृपया ध्यान दें कि यह परिचय अंग्रेजी में है. फार्मेट MP3

The audio extracted from Introduction To Hindi 1 video. In MP3 format here for those with limited bandwidth.

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चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

[यह लेख हमारे चिट्ठे “सारथी” से लिया गया है. सारथी का जाल-पता इस चिट्ठे की कडियों में आपको मिल जायगा. सारथी पर आज ही पधारना न भूलें]

जैसा मैंने पिछले लेख में कहा था कि सिर्फ मंगल फांट ही फिलहाल अच्छा परिणाम देता है. लेकिन,  चिट्ठाकार सिर्फ “मंगल” का ही प्रयोग करे तो भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वह मंगल ही रहेगा. चिट्ठे को चलाने वाला सफ्टवेयर उपभोक्ता की जानकारी के बिना कई बार उसको बदल देता है. मेरे चिट्ठे में यह अकसर होता रहता है, और मुझे उसके कारण अतिरिक्त प्रयास करना पडता है. अखण्डित चिट्ठा चाहते हैं तो आपको भी इस की जानाकारी रखनी होगी. इन विषयों के बारे में विस्तार से तकनीकी चर्चा (सरल तरीके से) अगले चिट्ठे में करेंगे. 

इस चिट्ठे में हम एक विशेष औजार से आपका परिचय करवाना चाहते हैं जो चिट्ठाकारी में आपका विश्वस्त सेवक सिद्ध होगा. इसका अधिकृत नाम है Windows Live Writer. देखने में यह एक शब्द संसाधक के समान लगता है, और काफी कुछ इसका उपयोग भी उसी तरह से होता है. अंतर यह है कि आप इसकी सहायता से अपने संगणक पर अपना चिट्ठा तय्यार कर सकते हैं. जाल से सम्पर्क की कोई आवश्यक्ता नहीं है. जब आपका चिट्ठा पूरी तरह से तय्यार हो जाये तो अपने संगणक को जाल से जोड दीजिये एवं इस औजार को  आज्ञा दीजिये और यह अपने आप आप के चिट्ठे को आपके जाल-स्थल पर पहुचा देगा, स्थापित कर देगा. इससे समय की बहुत बचत होती है, एवं लिखते समय  जाल-सम्पर्क की आवश्यक्ता न होने के कारण पैसे की भी बचत होती है. इसे आप निम्न जाल-स्थल से प्राप्त कर सकते हैं:

Download Windows Live Writer

इसके उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी — चित्र सहित — अगले लेख में देंगे.

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[यह लेख हमारे चिट्ठे “सारथी” से लिया गया है. सारथी का जाल-पता इस चिट्ठे की कडियों में आपको मिल जायगा. सारथी पर आज ही पधारना न भूलें]

हिन्दी मे हर तरह का चिट्ठा लिखने के लिये बहुत लोग तय्यार है, उनके पास लिखने के लिये समय है, और पाठकों को देने के लिये उनके पास बहुत सामग्री है. इतना ही नहीं, उन मे से बहुतों के पास विविध तरह की सामग्री है जिसे वे काफी सृजनात्मक तरीके से प्रस्तुत करना भी जानते हैं. लेकिन सबसे बडी समस्या यह है कि यह कैसे करेंगे. इंटरनेट एवं संगणक का विकास अंग्रेजी के ऊपर आधारित है, और भारतीय भाषाओं (या गैर-आंग्ल भाषाओं) के लिये पर्याप्त साफ्टवेयर उपलब्ध नहीं है.जो उपलब्ध है उनमे आपसे में किसी तरह का सामंजस्य नहीं है. फलस्वरूप किसी एक फान्ट मे लेख लिखा जाए तो इस बात की गारंटी नहीं है कि दूसरे लोग उसे पढ सकेंगे.

अंग्रेजी मे किसी एक फान्ट मे लेख लिखा जाये, और पढने वाले की मशीन पर वह फान्ट न हो तो उसके बदले कोई और फान्ट आ जाता है और पढने मे रुकावट नहीं आती है. लेकिन हिन्दी के फान्टों मे इस तरह का तालमेल नहीं है. इस कारण एक के बदले दूसरा फान्ट ले लिया जाये तो पाठ्य सामग्री एकदम अपठनीय चिन्हों मे बदल जाती है. इसका एक ही हल है: हिन्दी मे यूनिकोड फान्ट विकसित किये जायें. इनकी विशेषता है आपस मे पूर्ण सामंजस्य, और हर भाषा के फांन्टों मे एक सार्वलौकिक समंजस्य स्थापित करने के लिये ही यूनिकोड ढांचे का विकास किया गया है.

हिन्दी मे चिट्ठा लिखने वाले यदि हिन्दी के यूनिकोड फान्ट का प्रयोग करे तो फायदा यह होगा कि पढने वाले के मशीन पर यदि एक भी यूनिकोड फान्ट होगा तो वह उस लेख को पढ सकेगा. इस बात को मन मे रख कर अगले लेख को पढें.

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